गुरु के बिना ज्ञान नहीं

इस दुनिया में गुरु के बिना तत्व ज्ञान मिलना लगभग असंभव है। यह गुरु-शिष्य परंपरा सनातनी है। जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपना शिष्य बनाकर पूरी गीता का ज्ञान सहज ही दे दिया। तब से भी अगर देखा जाए तो यह गुरु-शिष्य परंपरा सतत चली आ रही है। यह उससे भी पहले से चली आ रही है और आगे भी चलती रहेगी।

गु+रु=गुरु। गु माने अंधेरा रु माने प्रकाश। जो अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाए वही गुरु है। इसलिए मनुष्य के जीवन में गुरु का बहुत महत्व है। वेदों-पुराणों से लेकर हर धार्मिक साहित्य में आपको गुरु की महिमा का वर्णन मिल जाएगा। गुरुकृपा का अनुभव किए कई लोग आपको इस दुनिया में मिल जाएंगे। उन्हीं मे से मैं भी एक हूँ ।

बहुत सारे पुण्य जब इकट्ठा होते हैं तब कहीं जाकर एक सच्चे गुरु की प्राप्ति होती है। इसलिए ही कहा गया है कि-

जब तक गुरु मिले नहीं साँचा। तब तक गुरु करो दस पाँचा।।

और एक बार जब सत्य गुरु मिल जाएं तो- सांचें गुरु के पक्ष में मन को दे ठहराय, चंचल से निश्चल भाया नहिं आवे नहिं जाय।।

-राजेश मिश्र

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समय से पहले ही

          
                ।।समय से पहले ही।।

     
      क्यों आजकल बीत जाता है बचपन
                 समय से पहले ही
    समय से पहले ही बच्चे बड़े हो जाते हैं
        करने लगते हैं सयानों सी बातें
    
    कितनी जल्दी खो जाती है मासूमियत
     वो खिलखिलाना हर बात पर हँसना
   वो रूठना मनाना अनायास जिद करना
     सहज ही आकर लिपट जाना गले से

खा रही है आजकल बचपन जवानी किस्से-कहानी हैं कहाँ वो नाना-नानी
उछलना- कूदना छत पे हुड़दंग मचाना
कहाँ खो गया है वो परियों का ज़माना

       मैनें कल सुबह देखा सड़क पे
   किताबों के बोझ से सहमा-दबा-सा
     चला जा रहा था बचपन बेचारा
      घिसटता दौड़ता समय से हारा

         ज़रा सोचो कि हम क्या दे रहे हैं
         बच्चों को समय से पहले ही
   ज्ञानी बनाकर उनकी खुशियाँ खो रहे हैं
                समय से पहले ही

   हर कोई ज्ञान दे रहा है माता-पिता भी
   स्कूल, ट्यूशन में टीचर का भी लेक्चर
   YouTube, Google, और Yahoo
  बच्चा खोजता खुदको कहता मैं कहाँ हूँ

इससे पहले कि गुम हो जाए सहजता
     बच्चों को बच्चा ही रहने दो, मैं कहता
     समय से सीख लेंगे वो सारी हकीकत
   बच्चा बुजुर्ग हो जाए, क्या है ज़रूरत

                     ।। समाप्त।।
     

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An inspiration all you need

Inspiration is a basic factor required for anything in life. It is a starting force which is must for emerging from the dust.

Inspiration can come from many things and anything. It is different for different people. One could be inspired by looking a rising sun, while others could be inspired by looking an innocent child. Just calm and quiet child.

When in the morning I start for my office, I see all the people moving and doing something. Nobody free. All people are engaged in something. In this fast moving haphazard life nobody is free or idle inspite of his old age. This inspire me lot. I feel like running with them and accomplish my tasks too with the same amount of ‘JOSH”.

They were unstoppable and even me. Nobody can stop one’s willingness to conquer, willingness to live life better beyond his imagination.

Search for this lightning force everywhere you can. Recognize it carefully and adopt it wholeheartedly.

As early as possible, wake-up, don’t sleep till you achieve what you have planned. Be ready to receive and stretch your palm what God wants to give you to make you happy and calm.

By- Rajesh Mishra

9970945593

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हे गौरीसुत गणपति चले आइए

चले आइए, चले आइए।
हे गौरीसुत गणपति चले आइए।। 2
हे शंकर के लल्ला चले आइए।
हे गौरीसुत गणपति चले आइए।। 2

चले आइए है ज़रूरत बहुत।
तुम्हारी हमें सुन लो गौरी के सुत।।
बरसे चारों तरफ़ दुख के बादल यहाँ।
बस तेरा है सहारा अब जाएं कहाँ।।

विनती है तुमसे जल्दी पधारिए।
हे गौरीसुत गणपति चले आइए।। 2

हर तरफ़ देखो मंदी मचाए है शोर।
नौकरी बिन भटकता है भारत किशोर।।
रोजी-रोटी का कुछ तो करो तुम जुगाड़।
इस मंदी को मारो दे धोबीपछाड़।।

अर्थव्यवस्था की गाड़ी पटरी पे लाइए।
हे गौरीसुत गणपति चले आइए।।

पूरा भारत है डूबा इस बरसात में।
सर की छत भी तो बह गई कल रात में।।
है ज़रूरत जहाँ, वहाँ पानी नहीं।
पानी-पानी जहाँ, बरसे पानी वहीं।।

इन्द्र राजा को थोड़ा-सा समझाइए।
हे गौरीसुत गणपति चले आइए।। 2

लाया मोदक मिठाई तुम्हारे लिए।
अपनी कुटिया सजाई तुम्हारे लिए।।
अब चले आइए, अपने भक्तों के घर।
सबने पलकें बिछाई तुम्हारे लिए।।

दे दो दर्शन हमें, अब ना सताइए।
हे गौरीसुत गणपति चले आइए।। 2
हे शंकर के लल्ला चले आइए।
हे गौरीसुत गणपति चले आइए।। 2

गीतकार: राजेश मिश्र

9970945593

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मामू का पत्र

इन भूलोकवासियों की भी न दूसरों में गलतियाँ निकालने की सनातनी आदत कभी
जाएगी नहीं। जितना ध्यान चंद्रयान भेजकर रोज़ मेरी नई-नई फोटो लेकर मेरी सतह पर मौजूद गड्ढों को दिखाने पर लगा रहे हैं, उससे आधा भी अगर अपनी सड़कों पर हुए गड्ढों पर लगाते तो सड़कें मौत का कुवां न बनती।

इनके शहरों से अच्छी तो इनके गावों की सड़कें हैं। शहरों में रोज़ बढ़ती ट्रैफ़िक की समस्या में इन गड्ढों की भी वैसी ही भूमिका है, जैसे कोढ़ में खुजली की। ये गड्ढे ट्रैफ़िक की समस्या को और गंभीर बीमारी बना रहे हैं।

सड़कों पर अपना साम्राज्य जमाए इन गड्ढों के कारण रोज़ कई दुर्घटनाएं हो रही हैं जिनमें जान-माल का काफी नुकसान हो रहा है, लेकिन इनका प्रशासन आँख मूदे पड़ा है। गाहे-बगाहे जब कभी किसी नेता की सवारी जिस किसी सड़क पर निकलती है, तब उस सड़क की रातों रात किस्मत सँवर जाती है।

पता नहीं ठेकेदार कौन सा डामर सड़कें बनाने में उपयोग करते हैं जो पानी बरसते ही ऐसे बह निकलता है जैसे बारिश का बस इंतज़ार ही कर रहा हो कि तू बरस और मैं बहा। विक्रम और बैताल जैसा कि विक्रम तू बोला और मैं चला।

ठेकेदार भी बेचारा सिस्टम का मारा। काम तो उसे भी चाहिए दोबारा। सिस्टम में विराजमान सभी देवताओं को प्रसाद चढ़ाते-चढ़ाते उसके हिस्से में भी तो रामदाना ही बचता है। इसीलिए वह नई सड़कें बनाने से लेकर उसकी मरम्मत भी अद्भुत अस्थायी रूप से करता है। ताकि हर तीसरे-चौथे महीने किसी न किसी सड़क का काम निकलता रहे। इसी को कहते हैं दूरदृष्टि।

लेकिन दृष्टि इतनी दूर भी डालने को किसने कहा था कि सीधे चंद्रयान ही भेंज दिया। लगता है कि सिस्टम के ठेकेदारों को यहाँ का भी ठेका लेना है। अरे भाई मैं सब समझता हूँ तुम भूलोकवासियों की चाल। चंदामामा बोल-बोल के मुझे मामू मत बनाओ। ऊँगली दिया तो हाथ भी पकड़ लोगे। लेकिन सुन लो मेरे यहाँ मेरा प्रशासन चलता है और वह दिन-रात जागता है ताकि उसके तारों को कोई परेशानी न हो। तुम्हारी तरह नहीं कि जनता मरती रहे और प्रशासन को मरघट के दरबान की तरह कोई फ़र्क ही न पड़े।

अरे पहले अपने दामन में लगे दागों को देखो पृथ्वी के लोगों। पता नहीं कितने वर्षों से चिल्ल-पो मचाए हुए हैं कि चंद्रमा में दाग है-चंद्रमा में दाग है। कभी अपने भी दाग दिखें हैं तुम्हें? अरे जब तुम अपनी कमियों और अपने दाग-धब्बों को नही हटा सके तो अब कहते हो कि “दाग अच्छे हैं”।

चलो अच्छा बहुत बातें हो गईं। अब मुझे मेरा काम करने दो। वह तो पूर्णमासी का जोश था जो इतनी बातें तुम लोगों से कर सका। इससे पहले कि कल से रोज़ घटने लगूं अभी मुझे बहुत से काम करने हैं अमावस्या आने के पहले।

अच्छा चलता हूँ, दुवाओं में याद रखना…

आपका प्यारा मामू (चंदामामा)

304, सबसे ऊँची मंजिल,
चंद्रलोक। पिनकोड-000000
मोबाईल: आपका दिल (जब भी याद करो)

आपका- राजेश मिश्र
















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Just a Thank you

Expression of gratitude is miraculous. It has the potential of changing one’s life.

We should be grateful to the almighty God who has provided us so many necessary things in life like water, air, Sunlight wthout which we can’t imagine life on earth.

We have the tendency to say thank you to everyone in our day to day life for even small things. But we forget to say thank you to God even once throughout the day. Just a small thank you twice a day once in the morning and evening.

Believe me saying thank you to God twice a day could stop your medicines thrice a day.

God is very generous. He forgives very fast. When a person confess for his sins committed knowingly or unknowingly, in a fraction of time God forgives him or her.

Apart from seeking forgiveness from God one should also promise to him that he will not commit any sin in his life now.

Live for noble causes like helping poor and needy one. Educating poor society of the community. Provide food and necessary life saving things to needy people.

Donate something daily. It may be cash or kind or even spare your time to help anyone in any manner.

Prayer is a music of soul. Pray daily in a language you are comfortable with. Language, cast, creed, color are no barriers between God and you.

So, start what have been suggested and feel the changes in your life for sure. Many have experienced it including myself and now it’s your turn.

JUST A THANK YOU

By- Rajesh Mishra

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।।चुनाव।।

           

नेता घूमे नगरी नगरी देखो आया है चुनाव। देखो आया है चुनाव, देखो आया है चुनाव

बांधे सर पर झूठ की पगड़ी देखो आया है चुनाव।।

नेता घूमे नगरी नगरी देखो आया है चुनाव।।

कह के गए थे तब की भैया देंगे बिजली पानी।
गांव-गांव चमकेगा जैसे शहर कोई जापानी।।

पानी का टोटा ना होगा होगी घर-घर टोंटी। पीने नहाने धोने की तकलीफ न किसको होगी।।

पर मर गए प्यासे गांव के गांव देखो आया है चुनाव।

बाँधे सर पे झूठ की पगड़ी देखो आया है चुनाव।।

नेता  घूमे नगरी नगरी देखो आया है चुनाव।।

बड़े-बड़े बड़े वादे थे उनके बड़ी-बड़ी थी कसमें।

बोले थे स्कूल खुलेगा मिलेगी शिक्षा जिसमें।।

चुन्नू मुन्नू रामू श्यामू पढेंगे अब मन लाय।

पर अनुदान मिला सरकारी जो वह नेताजी गए खाय।।

कि देते घोटालों के घाव देखो आया है चुनाव।

नेता घूमे नगरी नगरी देखो आया है चुनाव।। बांधे सर पर झूठ की पगड़ी देखो आया है चुनाव।।

वादा था कि खुलेंगी जल्दी अब राशन दुकानें।

रोटी को तरसेंगे ना बच्चे बूढ़े और सयाने।।

पर कलयुग में देखो कैसा समय गया है आय।

दाना खाते-खाते नेता चारा भी खा जाय।।

कि रखते रबड़ी का भी चाव देखो आया है चुनाव।।

नेता घूमे नगरी नगरी देखो आया है चुनाव।।

बांधे सर पर झूठ की पगड़ी देखो आया है चुनाव।।

सब कहते हमको ही चुनना जब भी चुनने आव।

हम ही दर्द मिटायेंगे अब हम ही भरेंगे घाव।।

पर कैसे विश्वास करें अब राजू तुम ही बताव।

दर्शन दुर्लभ हो जाएगा बीतेगा जो चुनाव।।

तो चक्कर खाते उमर बिताव देखो आया है चुनाव।।

देखो आया है चुनाव देखो आया है चुनाव।
नेता घूमे नगरी नगरी देखो आया है चुनाव।।

बांधे सर पर झूठ की पगड़ी देखो आया है चुनाव।।
 
                    ।समाप्त।

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।।माँ शारदे।।

                

माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे।
तू सारे जग को ज्ञान की गंगा पिलाकर तार दे ।। 2  माँ शारदे…

तू सत्य ज्ञान विवेक दे, तू विचार हमको नेक दे।
सुविचार का संदेश दे, कुविचार को तू मार दे।।

माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे।।

हर धर्म हो सत्कर्म अब, मानवता ही हो धर्म अब।
जिस धर्म में नफ़रत हो तू उस धर्म को ही नकार दें।
तू सारे जग को ज्ञान की गंगा पिला कर तार दे।।  माँ शारदे…

हर सदी हर काल में, रावण का जब-जब हो जनम।
तब राम को पृथ्वी पर ला रावण को तू संघार दे।।
तू सारे जग को ज्ञान की गंगा पिलाकर तार दे।। माँ शारदे…

इच्छा यही है मातु सुन, सोचें सही समझें सही।
कर्तव्य का पालन करें, सच्चाई से हम अब सभी।।

बस इतना कर उपकार दे, हे वीणा वादिनी प्यार दे।
तू सारे जग को ज्ञान की गंगा पिलाकर तार दे।।

माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे।
तू सारे जग को ज्ञान की गंगा पिलाकर तार दे ।। 2  माँ शारदे…

नोट: माँ शारदे की यह वंदना ऑल इंडिया रेडियो मुंबई से मेरे ही स्वर में दो बार  प्रसारित की जा चुकी है।

                     । समाप्त।

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